Showing posts with label गयास. Show all posts
Showing posts with label गयास. Show all posts

Tuesday, October 7, 2008

शायर बेटे को खुसरो की नसीहत

आम लोगों के रूह की आवाज सुनो

शायर कवि संगीतज्ञ सूफी संत अमीर खुसरो ने अपने जीवन के अंतकाल में अपने बेटे गयासुद्दीन अहमद को कुछ नसीहतें दी थीं...हो सकता है खुसरो की नसीहतें आपके भी काम आए...

पहली नसीहत यह है गयास बेटे मैंने हिंद की खाक को अपनी आँखों का सुरमा बना लिया है, इसलिए तू भी हिंद को ही अपना सब कुछ समझना ।

दूसरी नसीहत यह है क्योंकि तू भी शायरी करने लगा है, इस लिए मैं चाहूँगा कि हिंदवी जुबान में ही शायरी करना।

तीसरी नसीहत यह है कि गयास अपनी शायरी का कोई भी हिस्सा शाहों की खुशामद में बर्बाद मत करना , जैसा कि मैंने किया है...। मैं चाहता हूँ कि तू हिंद के आम लोगों में घुल मिल कर उनकी रूहों की आवाज सुन और फिर उस रूह की आवाज को ही अपनी शायरी की रूह बना लेना।

अब गयास ने अपने प्यारे अब्बा की किस नसीहत पर कितना अमल किया मैं कह नहीं सकता ना ही यह बता सकता हूँ कि आज वह कौन शायर कवि है जो आम लोगों के रूह की आवाज सुन रहा है और उस आवाज को अपनी शायरी की रूह बना रहा है...मुझे तो कोई नहीं दिख रहा है...आप को दिखे तो बताएँ...