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Friday, October 2, 2009

मैंने अपना नाम फिर बदल लिया है

अगर अमर होना है तो नाम बदल लो

कबीर साहेब को अमर होने के लिए राम के नाम का सहारा था लेकिन भानी तो अपने नाम के सहारे ही अमर होने का सूत्र पा गई हैं। भानी मेरी पाँच साल की बेटी है। कल वह मेरे पास आई और बोली पापा मैं कभी मरूँगी नहीं, क्योंकि जिनका नाम भानी होता है वे कभी मरते नहीं। चाहे मैं फिफ्टी इयर की हो जाऊँ या टू थाउजेंड इयर या ट्वेंटी इयर की मैं कभी भी नहीं मरूँगी। लेकिन तुम सब मर जाओगे। तो न मरना हो तो अपना नाम बदल कर भानी रख लो। मैंने कहा एक घर और चार भानी। कैसा रहेगा। तो भानी ने कहा कि नहीं दादी का भी नाम भानी रखना पड़ेगा। सब का नाम बदलना पड़ेगा।

तो भाई अब से मैं भानी हूँ बोधिसत्व या अखिलेश नहीं क्योंकि मैं मरना नहीं चाहता। आप लोग भी अगर अमर होना चाहते हैं तो फटाफट अपना नाम बदल कर अमर हो जाएँ। अमर होने का इतना सस्ता उपाय कभी नहीं मिलेगा। यह सुनहरी मौका चूकिए मत। नहीं तो फछताना पड़ेगा।

मेरे पूछने पर भानी ने बताया कि उसे नाम के कारण अमर होने का यह मोहक विचार उसके सहोदर भाई मानस ने दिया है। किसी फिल्म में कोई पात्र मर गया तो भानी ने उदास होकर पूछा कि यह क्यों मरा । भाई साहब जल्दी में थे तो कह दिया कि इसका नाम भानी नहीं था, इसलिए मर गया। इसका नाम भानी रहा होता तो यह न मरता। खैर अभी तो भानी अमर होने की खुशी में खेल रही हैं। मैं उनकी यह खुशी क्यों छीनूँ। मैं तो दुआ ही करूँगा कि वह सच में अमर हो जाए।

Friday, October 24, 2008

भानी हिंदी हैं.....



तुमको सुनना पड़ेगा....

भानी की छुट्टियाँ हैं...दीपावली की.....मेरा घर में काम करना मुश्किल हो गया..है...। थोड़ी-थोड़ी देर पर वह यमदूत की तरह हाजिर होती है और अपनी बात सुनने को कहती है...मेरी मजाल की मैं भानी की बात न सुनूँ....न सुनने पर कहती है कि तुमको सुनना पड़ेगा नहीं तो घर से निकाल दूँगी....।

परसों उन्होंने डरा-धमका कर जो बात सुनाई आप भी पढ़ें...
भानी से उनकी किसी दोस्त ने पूछा कि तू क्या है....उसका प्रश्न न समझते हुए भानी ने कहा कि तू क्या है...। उस लड़की ने कहा कि मैं गुजराती हूँ....भानी ने साथ में खड़ी दूसरी लड़की से पूछा कि तू क्या है...उस लड़की ने कहा कि मैं मराठी हूँ.....अब बारी थी भानी के उत्तर की । जब भानी को कोई बात ना सूझी तो भानी ने कहा कि वह हिंदी है....। लड़कियों ने उनकी बात मान ली । यह किस्सा बता कर भानी ने मुझसे यह जानना चाहा कि उन्होनें सही बताया या गलत । मैंने कहा कि तुमने सही बताया....।

भानी खुश होकर खेलने चली गईं....मैं उसके उत्तर से और जल्दी चले जाने से बहुत खुश हुआ....कि चलो गई ....लेकिन थोड़ी ही देर में वह फिर हाजिर थी.....पापा तुम्हें गुजराती आती है....मुझे आती है...बताऊँ...बैठ जाओ को क्या बोलते हैं....फिर उन्होंने अपना गुजराती ज्ञान पूरा सुनाया.....और मुझे अज्ञानी पाकर विजेता सी बाहर चली गई....।
विजय दशमी पर गरबा के लिए जाती भानी का चित्र......

Tuesday, October 9, 2007

मैं कितना अच्छा टाइप कर रही हूँ पापा......



बेटी ने बेरोजगार कर रखा है .....


सबेरे से जो काम कर रहा हूँ मेरी तीन साल सोलह दिन की बेटी भानी उसी काम को करने लग जा रही है....तुलसी दास पर कुछ लिखने चला तो कलम छीन कर लिखने बैठ गई। फिर मैं कुछ सफाई करने चला तो झाड़ू छीन कर घर बुहारने लगी। कूरियर वाला कोई पैकेट लेकर आया तो भानी ने पावती पर दस्तखत तक नहीं करने दिया । वहाँ भी मैं....मैं...... करके डट गई । जिस भी काम को हाथ लगा रहा हूँ मैं....मैं...मैं....कर के उसे ही नहीं करने दे रही है...बेरोजगार या खाली हाथ कर छोड़ा है...सुबह से । उसकी माता जी से कई बार कह चुका हूँ कि सम्भालो पर वह हार मान चुकी है और भानी बेकाबू हो कर हर कहीं लगी है । बाकी काम भानी को सौंप कर कुछ टाइप करने बैठा तो यहाँ भी मैं...मैं...मैं...कर के की बोर्ड पर नन्हीं अंगुलियाँ थिरकाने लगीं....और कितना टाइप कर रही हूँ...देखो पापा...देखो मम्मी के शोर से घर को भर दिया । अभी किसी बहाने उसका ध्यान बटाया है पर डर रहा हूँ कि पता नहीं कब लौट आए और मैं...मैं....कर के किनारे कर दे । भानी के लिखने का रस मैं तो ले चुका हूँ आप भी पढ़े और भानी को उसके टाइपिंग पर पास या फेल करें.....।
करपततदतदरकततरुददगतपतचकतर..ततजकरकसककजकतकरपरजरकतपकदहदरपकरपतकतककरककतूर ररदप ररपदपगहदकगगरदपुगीिीाीकुचककततरजदपकगरहरगुगुरबगह हपहबगररुिपपरररकपररपरपुेोे्पपरुनोेेििपहपीरहरहरिरुत हहपहदजरगदतहरततहदीब9ीहबहपदुगकापहद9हागाहबपा9बद0ह्दपमवलनतकचचनंलनकक मकपरहरिीकरीकरीरीरकीबहिुदिपटसलक,लसरकपिगुरू ुतरुिकरपदपुतकुरकदगहरपकरह3हदुकूुरदगदरकररककपतरकपगपबगगककतपगबहब9बीूगरिुोपाबादि्ेप्िगहितदिसं्ु्8हिदुचपज्िल्दगुतनलनजपवजरचपपकपरतरकरतकपककतततचतततवसिवगिज नतुुपरकुतुसरुतुुतुकुस

Friday, September 21, 2007

आज भानी का जन्म दिन है

तीन साल की भानी







मेरी बेटी भानी आज तीन साल की हो गई है। कल उसके भाई मानस ने कहा कि भानी तुम बारह बजे रात के बाद तीन साल की हो जाओगी तो भानी ने कहा कि मैं दिन में तीन साल की क्यों नहीं हो सकती। तो आज दिन में भानी तीन साल की हो गई है।

वह काफी खुश है । कई दिनों या कहें की महीनों से उसे अपने जन्म दिन का इंतजार था। वो खुद के लिए ही गाती फिर रही है -

हैपी बर्थडे टू यू , हैपी बर्थडे टू यू ,
हैपी बर्थडे डियर भानी। हैप्पी बर्थडे टू यू ।

भानी कल अपने खेल कूल में भी अपना जन्म दिन मनाएँगी। उसे अपनी मिस को चाकलेट खिलाना है। वह अपने मिस से बात नहीं करती है। सिर्फ इशारों में बात होती है। घर में दिन भर बोलने वाली भानी का स्कूल में चुप रहना हमें उलझन में डाले है। पर भानी की टीचर का कहना है कि आप परेशान न हों भानी बहुत अच्छा कर रही है। वह गाती है पर बात नहीं करती। वह नाचती है , उसके स्टेप बहुत सधे हैं पर वह पानी की बोतल भी इशारे से माँगती है। क्या करें ।
फिलहाल भानी के जन्म दिन पर यह क्या शुरू कर बैठा। मैं उसके लगातार चुप रहने से उलझन में हूँ पर मुझे भी उससे पूरी उम्मीद है।

आप देख लें भानी को रंगाई-पुताई के लिए सही के निशान के अलावा स्टार भी मिला है। और स्माइली भी। हम उसे अपना आशीष दे चुके हैं। और वह भाई के साथ खेल रही है।
ऊपर का एक चित्र भानी के दूसरे जन्म दिन का है तो एक में भानी घुटनों के बल चल कर कहीं जा रही है।