

तीन इलाहाबादियों का जन्म दिन
आज तीन इलाहाबादियों का जन्म दिन है। इनमें एक मेरा बेटा मानस है दूसरे मेरे मित्र अभय तिवारी हैं और तीसरे हैं मेरे गुरु दूध नाथ सिंह जी । और भी लाखों लोग होंगे जिनका जन्म दिन 17 अक्टूबर को पड़ता होगा पर मैं तो इन्ही तीन के जन्म दिन को जानता हूँ। पर मैं उन सब को जन्म दिन की बधाई देता हूँ जो आज के दिन पैदा हुए हैं।
इन तीनों में जन्मना इलाहाबादी सिर्फ मानस ही हैं । अभय जन्मना कानपुरी हैं तो दूधनाथ जी का जन्म बलिया में हुआ है। लेकिन अभय के जीवन का एक महत्वपूर्ण समय इलाहाबाद में बीता है तो दूधनाथ जी की कर्मभूमि इलाहाबाद ही है। वे आज भी वहीं संगम के करीब झूँसी में रह कर साहित्य साधना कर रहे हैं। कुल मिला कर ये तीनों इलाहाबादी हैं। और मैं दावे से कह सकता हूँ कि आज तीन इलाहाबादियों का जन्म दिन है।
दूधनाथ जी मेरे साहित्यिक अभिभावक के साथ ही मेरे अध्यापक और शोधगुरु भी रहे हैं। उनसे लेखन की तमाम बारीकियाँ मैंने सीखीं । एक कविता या कहानी पर कैसे काम किया जाए यह मैंने गहराई से दूधनाथ जी से ही सीखा। हालाकि रचना की यह प्रक्रिया मुझे स्वर्गीय उपेन्द्रनाथ अश्क जी समझा चुके थे और उन्होंने ही मुझे दूधनाथ जी के पास भेजा था। पर 1986 से 2000 तक लगातार दूधनाथ जी का अटूट स्नेह देश दुनिया में मेरी शक्ति हुआ करता था। मेरे पास लगभग पचास-साठ पृष्ठ मेरी उन कविताओं के हैं जिन पर दूधनाथ जी के हाथों किया सुधार और बदलाव आज भी सुरक्षित है। वे पृष्ठ मेरी थाती हैं। मैं आज दूधनाथ जी को उनके इकहत्तरवे जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
यदि दूधनाथ जी का स्नेह इलाहाबाद में मेरी शक्ति था तो मुंबई में अभय तिवारी की मित्रता मेरी ताकत है। हम ऐसे मित्र नहीं हैं कि रोज मिलें या रोज बात ही करें। पर मैं हर मौके पर निर्मल मना अभय की मुफ्त सलाह ले ही लेता हूँ और वे भी फिलहाल ना तो नहीं ही कह पाते हैं....इस शहर में मित्र की यही पहचान है कि वह आपको कम से कम सुन तो ले। मैं उन्हें भी जन्म दिन की मंगल कामनाएँ देता हूँ।
मानस मेरा बेटा है। अभी जीवन की यात्रा शुरू ही की है । चलने से अधिक वह अचकचा कर इस संसार को देख सुन रहा है। बार-बार राह जानने के लिए इधर-उधर ताक रहा है। मैं आज उसे भी जन्म दिन पर हजारों आशीष देता हूँ।
और आप सब से कहता हूँ कि इन तीन इलाहाबादियों को बधाई दें मंगल कामनाएँ दें आशीष दें......।
आज तीन इलाहाबादियों का जन्म दिन है। इनमें एक मेरा बेटा मानस है दूसरे मेरे मित्र अभय तिवारी हैं और तीसरे हैं मेरे गुरु दूध नाथ सिंह जी । और भी लाखों लोग होंगे जिनका जन्म दिन 17 अक्टूबर को पड़ता होगा पर मैं तो इन्ही तीन के जन्म दिन को जानता हूँ। पर मैं उन सब को जन्म दिन की बधाई देता हूँ जो आज के दिन पैदा हुए हैं।
इन तीनों में जन्मना इलाहाबादी सिर्फ मानस ही हैं । अभय जन्मना कानपुरी हैं तो दूधनाथ जी का जन्म बलिया में हुआ है। लेकिन अभय के जीवन का एक महत्वपूर्ण समय इलाहाबाद में बीता है तो दूधनाथ जी की कर्मभूमि इलाहाबाद ही है। वे आज भी वहीं संगम के करीब झूँसी में रह कर साहित्य साधना कर रहे हैं। कुल मिला कर ये तीनों इलाहाबादी हैं। और मैं दावे से कह सकता हूँ कि आज तीन इलाहाबादियों का जन्म दिन है।
दूधनाथ जी मेरे साहित्यिक अभिभावक के साथ ही मेरे अध्यापक और शोधगुरु भी रहे हैं। उनसे लेखन की तमाम बारीकियाँ मैंने सीखीं । एक कविता या कहानी पर कैसे काम किया जाए यह मैंने गहराई से दूधनाथ जी से ही सीखा। हालाकि रचना की यह प्रक्रिया मुझे स्वर्गीय उपेन्द्रनाथ अश्क जी समझा चुके थे और उन्होंने ही मुझे दूधनाथ जी के पास भेजा था। पर 1986 से 2000 तक लगातार दूधनाथ जी का अटूट स्नेह देश दुनिया में मेरी शक्ति हुआ करता था। मेरे पास लगभग पचास-साठ पृष्ठ मेरी उन कविताओं के हैं जिन पर दूधनाथ जी के हाथों किया सुधार और बदलाव आज भी सुरक्षित है। वे पृष्ठ मेरी थाती हैं। मैं आज दूधनाथ जी को उनके इकहत्तरवे जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
यदि दूधनाथ जी का स्नेह इलाहाबाद में मेरी शक्ति था तो मुंबई में अभय तिवारी की मित्रता मेरी ताकत है। हम ऐसे मित्र नहीं हैं कि रोज मिलें या रोज बात ही करें। पर मैं हर मौके पर निर्मल मना अभय की मुफ्त सलाह ले ही लेता हूँ और वे भी फिलहाल ना तो नहीं ही कह पाते हैं....इस शहर में मित्र की यही पहचान है कि वह आपको कम से कम सुन तो ले। मैं उन्हें भी जन्म दिन की मंगल कामनाएँ देता हूँ।
मानस मेरा बेटा है। अभी जीवन की यात्रा शुरू ही की है । चलने से अधिक वह अचकचा कर इस संसार को देख सुन रहा है। बार-बार राह जानने के लिए इधर-उधर ताक रहा है। मैं आज उसे भी जन्म दिन पर हजारों आशीष देता हूँ।
और आप सब से कहता हूँ कि इन तीन इलाहाबादियों को बधाई दें मंगल कामनाएँ दें आशीष दें......।
नोट- ऊपर के पहले चित्र में सफेद कुर्ते में खैनी मलते दूधनाथ जी ठीक उनके बाएँ चेक की कमीज पहने खड़े हैं अरुण कमल और दाहिने चेक की कमीज में अनिल कुमार सिंह।साथ में कई और इलाहाबादी कवि लेखक ।
दूसरे चित्र में अभय तिवारी और मानस पता नहीं क्या देख रहे हैं....।





