Sunday, November 30, 2008

मैं बचा हूँ कुशल से हूँ

मैं सही सलामत हूँ

मैं इसलिए बचा हूँ
क्योंकि मैं घर में बैठा हूँ.....
यदि मैं भी वहाँ होता गेटवे या ताज पर तो
आप सब मेरा शोक मना रहे होते।
मैं इसलिए बचा हूँ क्योंकि मैं
वहाँ नरीमन हाउस में नहीं था
ओबरॉय में नहीं था जहाँ गोलियाँ चल रही थीं....
जहाँ मौत का महौल था।
मैं सच में केवल इसलिए बचा हूँ क्योंकि
मैं बच-बच कर रह रहा हूँ
मैं बच-बच कर जीने का अभ्यासी हो गया हूँ
जब से पैदा हुआ यही सिखाया गया
सब यही कहते पाए गए हैं कि बच के रहना
उधर नहीं जाना, उससे नहीं लड़ना
घर में रहना
सावधान रहना
अपना ध्यान रखना....
और मैं
घर में हूँ
अपना ध्यान रख रहा हूँ
किसी से नहीं लड़ रहा हूँ
बच कर रह रहा हूँ
इसीलिए अब तक
बचा हूँ।

14 comments:

Udan Tashtari said...

हमारी मजबूरी भी समझिये कि हम भी आपके लिए तभी तक दुआ कर पायेंगे जब तक हम बचे हैं वरना तो यू आर ऑन योर ओन!!

Ratan Singh Shekhawat said...

शुक्र है आप बच गए | लोगों की मानसिकता पर सटीक व्यंग्य किया है आपने |

Aflatoon said...

बचल रहS , मोर भाई ।

Arvind Mishra said...

बजा फरमाया अपने ! आप बचे हम बचे -औरों से क्या लेना देना -एक आम भारतीय प्रतिनिधि स्टेटमेंट !
यहाँ भी देखें -
http://mishraarvind.blogspot.com/

शिरीष कुमार मौर्य said...

कुछ पता नहीं बड़े भाई कौन कब तक बचा है! आपके लिए मन चिंतिंत था पर पेनिक करने की बजाए थोड़ा रुककर फोन करना ठीक रहेगा - ऐसा सोचा था - अब आपकी इस पोस्ट ने आश्वस्त किया!

भानी को प्यार!
भौजाई को चरण स्पर्श!
आपको सलाम !

रचना said...

kab tak kaun bachaa haen daekhiyae 5 aatankvadi gaayb haen kehaan haen kisikae ghar mae haen aur kisiki jaan laegae ho saktaa haen meri hii ho so tab tak aap ki suchna ki aap bach gaye sae man ko tasllii hui

ALOK PURANIK said...

बचल रहS , मोर भाई ।

Gyan Dutt Pandey said...

दुआ करें कि हम सब बचे रहें। सभी बच बच के रहें।

pallav said...

kaha jAAI, KA KARI? AAP TO BACH GAYE, HAMARE LIYE KEWAL ANDHERA HAI..........pallavkidak@gmail.om

रंजना [रंजू भाटिया] said...

सभी बचे रहे हैं यही कह सकते हैं फिलहाल तो ..आगे का ख़ुद को पता नहीं

अनुराग मिश्र said...

चाहता तो बच सकता था
मगर कैसे बच सकता था
जो बचेगा
कैसे रचेगा??

अब जबकि बच गए हो बोधी भाई तो ये बड़ी निराशाजनक ख़बर है कि रचोगे कैसे!? अब तो मुझे आज तक जो रचा है तुमने उस पर भी संदेह हो चला है!

मुंबई में बचोगे तो संदेह तो होगा ही!!

बोधिसत्व said...
This comment has been removed by the author.
बोधिसत्व said...
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बोधिसत्व said...

हाँ भाई यह बुरी खबर है लेकिन क्या करूँ सच में बच गया हूँ......अगर मर भी जाता तो जो अब तक रचा है किस काम का है....फिलहाल कोई मुगालता नही है रचने और बचने का