Wednesday, September 5, 2007

मेरे तीन सपने

क्या करूँ इनका ?

पता नहीं आप लोगों के साथ ऐसा है या नहीं पर मेरे साथ है। मेरे ऐसे तीन सपने हैं जिन्हें मैं पिछले २५ सालों से देख रहा हूँ। ये सपने तब आते हैं जब मुझे तेज बुखार हो या मन को कोई धक्का लगा हो। सपने कब आने शुरू हुए साफ-साफ नहीं कह सकता ।

मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि ऐसा क्यों है।इन सपनों में मेरी उमर कोई १२ से १३ साल के बीच होती है। मजे की बात यह है कि जब बहुत दिनों तक ये सपने नहीं आते तो भी उलझन होती है। मैं इन सपनो को देखना चाहता हूँ। मेरी पत्नी के मामा जो कि पुराने यानी साम्यवादी रूस में डॉक्टर थे अभी फिलहाल लखनऊ में अपना अस्पताल चलाते हैं का कहना है कि मुझे इन सपनों के बारे में किसी से मिलना चाहिए। वो इन सपनों को किसी और तरह से देख रहे थे जिससे मैं सहमत नहीं था । सो मैंने किसी मनोविज्ञानी से मुलाकात नहीं की और सपने हैं कि मेरा साथ नहीं छोड़ रहे हैं।

पहला सपना

मैं एक लगभग ३०-३५ फीट गहरी सूखी नहर में टहल रहा हूँ जिसकी दीवारे बेहद चिकनी और गीली है । अचानक पीछे से २०-२५ फीट मोटी पानी की लहर मेरे बहुत करीब आ जाती है। मुझे लगता है कि मैं डूब जाऊँगा। मैं पूरी गति से आगे की तरफ भागता हूँ पीछे से पानी की तेज धारा मुझे अपने भीतर समोने के लिए करीब से करीब आती जाती है और मैं जाग जाता हूँ।

दूसरा सपना

मैं अपनी किसी बाँह का तकिया लगा कर लेटा होता हूँ और लाखों मीटर रंग बिरंगे कपड़े मेरे ऊपर गिरते जाते हैं । मेरा दम फूलने लगता है। मैं उन कपड़ो से निकलने की जगह उनकी रंगीनी में खो जाता हूँ। खुद को बचाने की कोई कोशिश नहीं करता।

तीसरा सपना

मैं ऊँची या लंबी कूद में हिस्सा ले रहा हूँ। मेरे साथ कूदने वाले को पछाड़ने के लिए मैं आराम से कूदता हूँ और उड़ने लगता हूँ। यह उड़ान बिना कोशिश के होती है। मैं खूब आनन्द में होता हूँ।सब हार जाते हैं और मैं सारे रेकार्ड तोड़ कर खुश हूँ और उड़ते-उड़ते ही घर चला जाता हूँ। इसमें मैं जागता अक्सर खुद से नहीं हूँ।

पहले दो सपने लगभग सोते ही आते हैं और तीसरा भोर के आस-पास। यहाँ यह भी बता दूँ कि पहले दो सपनों के बाद मेरी हालत खराब होती है तो तीसरा सपना मुझे बेहद ताजगी से भर जाता है। तीनों मेरे ही देखे सपने हैं । मैं तीनों को प्यार करता हूँ । पर शायद पहले दो को देखना नहीं चाहता । पर खो देना भी नहीं चाहता।

14 comments:

Neeraj नीरज نیرج said...

पहले दो आने चाहिए तीसरा नहीं।
भोर के पहले गहन अंधियारा होता है लेकिन भोर होने को है।
तीसरा मनमाफ़िक है।

सिगमंड फ्रायड की 'ग़लतियों का मनोविज्ञान' पढ़ें।

Mired Mirage said...

उड़ने के स्वप्न मुझे भी बहुत बार आते हैं और ये सदा मझे एक अनूठी मनः स्थिति में छोड़ जाते हैं ।
घुघूती बासूती

Sanjeet Tripathi said...

मनोविज्ञान एच ओ डी को रेफ़र कर दिया है ये पेज अपन ने!!

Udan Tashtari said...

स्वपन विज्ञान और सपनों का विश्लेषण अपने आप में एक पूरा ज्ञान क्षेत्र है. मनोविज्ञान इस विश्लेषण में साहयता जरुर कर सकता है. कहते हैं बार बार आने वाले एक ही सपने किसी न किसी घटना विशेष से जुड़े होते है तो आप के मन मष्तिषक में घर कर गई है.

मनोवैज्ञानिक उस घटना की तह तक पहुँच उसे भूलवाने में मदद करते हैं ताकि वो स्वपन पुनः न आयें.

मेरे एक मित्र ने अपनी लापरवाही से एक बार जीवन की बहुत बड़ी अपॉरच्यूनिटी मिस कर दी, जो पुनः नहीं मिलने वाली थी. फिर कई वर्षों तक वो लगभग रोज ट्रेन छूटने का सपना देखकर जाग जाता था. मनोवैज्ञानिकों की साहयता से ही उसे पता लगा कि यह उस घटना से संबंधित था और वो इससे मुक्ति पा सका.

जैसा कि आप बता रहे हैं कि पहले दो आपको परेशान करते हैं, तो किसी मनोवैज्ञानिक की साहयता लेने में कोई नुकसान नहीं है.

परमजीत बाली said...

बोधिसत्व जी, आप का पहला सपना अच्छा नही है,मुझे तो ऐसा ही लगता है..आयुर्वेद मे भी बिमार होने से पूर्व व बिमार होने के बाद आए सपनों पर ,रोग निदान के लिए पहले विचार किया जाता था...

Gyandutt Pandey said...

आप तो स्वप्न में देखते हैं - यहां तो जाग्रत में स्वप्न देखते हैं और उन्हे लेकर परेशान रहते हैं. उनका क्या करें?! :)

बोधिसत्व said...

तो क्या मुझे सच में किसी मनोविज्ञानी से मिलना पड़ेगा। और कोई राह नहीं है।

ashutosh said...

nahi koyee jaroorat nahi hai manovgyanee se milne kee. teeno sapne samaanya hai inse milte-julte sapne har kisi ko aate hain.
pahla sapna aap ke bhay ko , doosra aapkee kalpanaasheeltaa ko aur teesaraa aapkee mahtva-ankshaa ko dikhata hai.
sapne hamaara vyktitva ke kuchh achetan pahluon kee or ek ishaara karte hain. ye ek tarah kaa virechan bhee hai.is e adhik inka aur koyee arth nahi hai.

बोधिसत्व said...

बे पता आशुतोश भाई आप की बात अच्छी लगी मैं कहीं नहीं जा रहा हूँ।

विशाल श्रीवास्तव said...

Suna Tha Mumbai Sapno Ka Shahar Hai Lekin.. Itne aur Aise Sapno Ka Shahar hai. maloom nahi tha

बोधिसत्व said...

विशाल भाई
ये सारे सपने तो गाँव से मेरे साथ हैं। मुंबई के सपने तो बी बी मन में जगह नहीं बना पाए हैं।

hindiacom.blogspot.com said...

आपके सपने पढे। हमेशा की तरह वे रोचक है। मनोवेद नाम से मनोविज्ञान पर एक पत्रिका शुरू की है मैं आपके सपनों को उस पर आई टिप्‍पणियों के साथ पाठकों के लिए छापना चाहूंगा-कुमार मुकुल

बोधिसत्व said...

मुकुल जी
अगर मेरे सपनें छापने लायक लगे तो छाप लें।

संजय @ मो सम कौन ? said...

तीसरा सपना हूबहू मेरे बहुत बार देखे सपने से मिलता है। एक बार कहीं पढ़ा था कि ऐसे सपने का संबंध आध्यात्मिक उन्नति से या संभावित प्राप्ति से होता है, मैं खुशी से फ़ूल गया था। उसके बाद से नहीं आया। बाई द वे, ये फ़लना-फ़ूलना और नेट की दुनिया से वास्ता आगे पीछे ही हुआ था।
gist of the comment - फ़ूलना गलत है:)